,

आईएएस अफसरो के बीच हो सकता है चुनावी मुकाबला

 Avatar
Spread the love

संगठन द्वारा आमला में कराए गए सर्वे में भाजपा की स्थिति कमजोर …!
आमला विधानसभा में  2 आईएएस के बीच हो  सकता है चुनावी मुकाबला

बैतूल। भाजपा संगठन द्वारा आमला विधानसभा में कराए गए सर्वे में भाजपा की स्थिति कमजोर बताई गई है। भाजपा के रनिंग विधायक की स्थिति कमजोर होने को लेकर सत्ता और संगठन सकते में नजर आ रहा है।

सूत्र बताते हैं कि आमला विधायक डॉ योगेश पंडाग्रे को जनता-जनार्दन के बीच जाने से रोकने में उनके सदिर्ग सफल हुए उन्होंने विधायक को ,,रेत,, के कारोबार में उतार कर उनकी साफ सुथरी छबि को दागदार बना दिया।
यदि वजह से मतदाताओं का रुझान रनिंग विधायक के पक्ष में सटीक नहीं बैठ पा रहा है।
राजनीतिक सूत्रों का मानना है कि यदि  डिप्टी कलेक्टर निशा बांगरे  कांग्रेस से टिकट लेकर आमला से चुनाव लड़ती है,तो भाजपा से  जबलपुर सम्भायुक्त के पद से स्थिपा देने वाले ,,बी चंद्रशेखर ,,जो बैतूल कलेक्टर भी रह चुके हैं भाजपा की टिकट पर वे भी आमला विधानसभा से चुनाव लड़ सकते हैं…?
गौरतलब रहे कि बी चंद्रशेखर ने 2002 में आईएएस बने थे नॉकरी के दौरान,वे रतलाम,बैतूल ,जबलपुर में अपनी सेवाएं दे चुके हैं।
राजनीतिक पंडितो का मानना है कि  भाजपा हर एक सीट को जीतने के लिए निर्बाद और जिताऊ उम्मीदवार को मैदान पर उतारने का मन बना चुकी है। यदि 130 आमला विधानसभा में कांग्रेस की तरफ से स्थिपा मंजूर होने के बाद निशा बांगरे चुनाव लड़ती है तो भाजपा से पूर्व कलेक्टर ,,बी चंद्रशेखर ,, का चुनाव लड़ना लगभग तय माना जा रहा है। आमला सीट से पूर्व विधायक चैतराम मानेकर भी संगठन से संपर्क बनाए हुए है।
हालांकि रनिंग विधायक डॉ योगेश पंडाग्रे अपनी दावेदारी को लेकर ताल ठोक रहे हैं।
निशा बांगरे का जन्म मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में हुआ था। अपने शुरुआती शिक्षा पूरी करने के लिए निशा ने 2010 से 2014 के बीच इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। इसके बाद वो गुरुग्राम के एक मल्टीनेशनल कंपनी में नौकरी करने लगी। इसी बीच इनका झुकाव सिविल सर्विस की ओर बढ़ने लगा, जिसकी वजह से उन्होंने ज्यादा समय तक नौकरी नहीं की। सिविल परीक्षा पास करने के बाद निशा ने साल 2016 में एमपी में डीएसपी का पदभार ग्रहण किया।
इसके बाद साल 2017 में उनका एमपी में डिप्टी कलेक्टर के पद पर चयन हो गया, जिसके बाद इनकी पहली पोस्टिंग बैतूल के आमला क्षेत्र में हुई। इस्तीफा देने से पहले निशा बांगरे छतरपुर जिले के लवकुश नगर में एसडीएम थीं। सनद रहे कि अभी निशा बांगरे का स्थिपा मंजूर नहीं होने की वजह वे जबलपुर न्यायालय की शरण मे चली गई है। निशा बांगरे ने 25 जून  23 को गृह प्रवेश के लिए समान्य प्रशासन विभाग से छुट्टी मांगी उसी समय आमला में सर्व धर्म शांति सम्मेलन आयोजित हुआ था।
बताया जाता हैबकी आमला विधानसभा का हर बौद्ध समाज के साथ अन्य समाज के लोगों का झुकाव निशा बांगरे की तरफ होने की जानकारी सामने आ रही है।

 Avatar

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Author Profile

John Doe

Lorem ipsum dolor sit amet, consectetur adipiscing elit, sed do eiusmod tempor incididunt ut labore et dolore magna aliqua. Ut enim ad minim veniam.

Latest posts
Search