*माह ए रमजान का आखरी अशरा ( अंतिम दस दिन) आज से आरंभ*

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*माह ए रमजान का आखरी अशरा ( अंतिम दस दिन) आज से आरंभ*
जावरा नि प्र।रहमत, मगफिरत और जाहन्नुम से आजादी के मुकद्दस माह रमजान का आखरी अशरा (अंतिम दस दिन) सोमवार से आरंभ हो गए । इस आखरी दस दिन की इबादत में से एक इबादत ऐतकाफ भी है, जिसे मर्द मस्जिदों में और औरतें अपने घरों में एकांत स्थान में बैठकर इबादत करते हैं।
उक्त जानकारी में आसिफ अनवर घड़ी ने बताया कि रमजान माह के आखरी दस दिनों में किए जाने वाले ऐतकाफ को रमजान की 21वे रोजे पूर्व की रात्रि से पूर्व अर्थात आखिरी असरे में ईद का चांद दिखने तक मस्जिद में रहने को ऐतकाफ कहते हैं । ऐतकाफ करने वाला इंसान स्वंय को सारी दुनिया और फिक्र से अलग कर तनमन से रब की इबादत करता है।
आपने बताया कि ऐतकाफ में नमाज, रोजा, कुरान की तिलावत और दीनी किताबों को कसरत से पढ़ अल्लाह रब्बुल इज्जत का जिक्र करना चाहिए। आखरी अशरे में अल्लाह रब्बुल इज्जत ने शब-ए-कद्र भी अता फरमाई। यह शब जिस इंसान को नसीब हो जाए उसे हजार रातों से ज्यादा इबादत का शवाब हासिल होता है। इन रातों में कसरत के साथ कुरान की तिलावत, तस्बीह पढ़ना और दुआ करने के साथ अपने गुनाहो से अस्तगफार करना चाहिए
तथा ऐतकाफ हर उस मस्जिद में होता है जहां पंचवक्ती नमाज जमात के साथ होती हो। यदि रमजान अपने वतन में कर रहे हो तो कोशिश करनी चाहिए की ऐतकाफ अपने वतन की मस्जिद में कर देश की खुशहाली और तरक्की की दुआ करे।
श्री अनवर ने बताया कि आज इक्कीसवां रोजा भी है,इस रोजे पर दस्तर ख्वान पर फ्तेहा का महत्व है इस दिन मौला अली शहर खुदा की फतेह के लिए दस्तरखान लगाया जाता है।ये फतेहा हर मस्जिद और घरों में दिलाई जाती है।

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